स्कूल शिक्षा विभाग कबीरधाम के तत्वावधान में विभाजन की विभीषिका दिवस पर आयोजित विविध कार्यक्रम
स्कूल शिक्षा विभाग कबीरधाम के तत्वावधान में विभाजन की विभीषिका दिवस पर आयोजित विविध कार्यक्रम
कवर्धा.. भारत और पाकिस्तान का त्रासद बंटवारा विषय पर स्वामी करपात्री जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कवर्धा में परिचर्चा व क्विज प्रतियोगिता जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर.वर्मा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी यू.आर.चन्द्राकर, सहायक संचालक एम.के.गुप्ता, नीलेश चन्द्रवंशी एवं एम.आई.एस., प्रशासक सतीश कुमार यदु ने नेतृत्व में आयोजन सफल रहा । जिले के कवर्धा विकासखंड के 10 शासकीय व अशासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज की और प्रत्येक विद्यालय से विद्यार्थियों ने इतिहास परक अपने संवेदनशील विचार रखें जिसमें आदित्य नारायण तिवारी रामकृष्ण पब्लिक स्कूल कवर्धा प्रथम स्थान पर रहे ।
प्रत्येक विद्यालय से चार प्रतिभागियों की टीम ने अपने विद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वतंत्रता संग्राम व संविधान पर आधारित क्विज प्रतियोगिता में भाग लिया। अंत में जारी क्विज प्रतियोगिता परिणाम में सेजेस दुर्गावती चौक कवर्धा की टीम प्रथम, गुरूकुल पब्लिक स्कूल द्वितीय स्थान व होली किंगडम स्कूल की टीम तृतीय स्थान अर्जित किए जिन्हे विभाग की ओर से मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
परिचर्चा हेतु आमंत्रित इतिहास के जानकार आदित्य श्रीवास्तव से. नि. व्याख्याता, अजय चन्द्रवंशी सहा. वि.खं. शिक्षा अधिकारी कवर्धा एवं विख्यात उद्घोषक अवधेश नंदन श्रीवास्तव सहा. परियोजना समन्वयक ने उपस्थित विद्यार्थियों व शिक्षकों के बीच अपने विचार रखे।
परिचर्चा के दौरान विद्वान साथियों ने बताया 15 अगस्त 1947 को भारत ने ब्रिटिश हुकूमत से स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन यह आजादी अपने साथ इतिहास का सबसे बड़ा और दर्दनाक विभाजन लेकर आई। धर्म के आधार पर भारत को विभाजित कर एक नया देश ‘पाकिस्तान’ बनाया गया। यह केवल एक भौगोलिक सीमा रेखा का खिंचना नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों की संस्कृतियों, परिवारों और जिंदगियों का उजड़ना था।
दशकों से पनप रही राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का परिणाम के साथ ही अंग्रेजों की ‘बांटो और राज करो’ की नीति, 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच फूट डालने, 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों के तहत मुस्लिमों को पृथक निर्वाचिका देना इसी नीति का हिस्सा था।
द्वि-राष्ट्र सिद्धांत अंतर्गत मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग का तर्क कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, जिनकी संस्कृति, धर्म और जीवनशैली भिन्न है, इसलिए वे एक साथ नहीं रह सकते प्रभावी रही।
लार्ड माउंटबेटन ने भारत की आजादी के साथ-साथ विभाजन की योजना प्रस्तुत की, जिसे कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने स्वीकार कर लिया।
ब्रिटिश वकील सर सिरिल रेडक्लिफ, जिन्हें भारत के भूगोल और सामाजिक ताने-बाने की कोई जानकारी नहीं थी, को पंजाब और बंगाल के बंटवारे का काम सौंपा गया और सीमित समय में सीमाओं को चिन्हित करने के परिणामस्वरूप लाखों लोगों का अभूतपूर्व मानवीय विस्थापन हुआ।
पंजाब और बंगाल की सीमाओं के दोनों तरफ से लगभग 1.5 करोड़ लोगों ने अपने पुरखों के घर छोड़कर पलायन करने मजबूर हुए।
इस हेतु भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में विशाल शरणार्थी शिविर बनाए गए, जहां भुखमरी, हैजा और पीने के पानी का भारी संकट था।
पलायन करने वाले लोगों को अपनी जमीन, मकान, व्यवसाय और जमा पूंजी छोड़कर केवल एक-दो कपड़ों में भागना पड़ा।
विभाजन का सबसे काला पहलू वह भयानक हिंसा थी, जिससे मानवता शर्मसार हुई और भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अनुमानत: 5 लाख से अधिक लोग मारे गए।
‘लाशों ट्रेनें भर गई, सीमाओं के पार जाने वाली ट्रेनें अक्सर केवल लाशों से भरकर पहुंचती थीं। दोनों ओर से उग्र भीड़ ने रेलगाड़ियों को निशाना बनाया। यौन हिंसा हुई और जबरन धर्म परिवर्तन भी कराया गया। हजारों बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ गए और हिंसा के बीच अनाथ हो गए।
मह विभाजन केवल भूमि का बंटवारा नहीं हुआ, बल्कि प्रशासनिक और भौतिक संपत्तियों का भी बारीकी से विभाजन किया गया।
राजनीतिक प्रभाव यह रहा कि 1947 का विभाजन केवल इतिहास का एक पन्ना नहीं था, बल्कि इसके प्रभाव आज भी महसूस किए जाते हैं।विभाजन के तुरंत बाद 1947 में ही कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध हुआ। इसके बाद 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्ध इसी विभाजन की अतृप्त महत्वाकांक्षाओं का परिणाम रहे हैं।
विभाजन के दौरान गंवाई गई जानों और झेले गए कष्टों की याद में भारत सरकार ने वर्ष 2021 से हर साल 14 अगस्त को “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम के समापन पूर्व मुख्य वक्ताओं को विभाग की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम में प्राचार्य स्वामी करपात्री जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डी.एस.जोशी. विभिन्न विद्यालयों से सम्मिलित शिक्षक उपस्थिति रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु जितेंद्र सिंह ठाकुर व्याख्याता ने किया।







