कबीरधाम

हरित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने जुटे पत्रकार और वन अमला, करिया आमा में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हरित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने जुटे पत्रकार और वन अमला, करिया आमा में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कवर्धा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा वन मंडल कबीरधाम के सहयोग से करिया आमा जंगल सफारी परिसर में एक प्रेरणादायी पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राज्य सरकार की मंशानुरूप वन मंडल अधिकारी निखिल अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा भोरमदेव अभ्यारण्य की अधीक्षक अनीता साहू के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता का प्रभावी संदेश दिया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन पटेल एवं उनकी टीम के साथ वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, पत्रकारों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

करिया आमा जंगल सफारी की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ पौधारोपण के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रजातियों के छायादार और फलदार पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं था, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराना भी था।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन पटेल ने कहा कि पर्यावरण और मानव जीवन का संबंध अत्यंत गहरा है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव सभ्यता का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिवस तक सीमित औपचारिक कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। श्री पटेल ने लोगों से अपील की कि वे पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल भी करें, क्योंकि एक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकार समाज को दिशा देने और जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे अभियानों में पत्रकारों की सक्रिय भागीदारी समाज के लिए प्रेरणादायी है।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के जिला अध्यक्ष श्याम टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि जंगल, जल और जमीन मानव जीवन की आधारशिला हैं तथा इनके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। तेजी से घटते वन क्षेत्र और बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

वरिष्ठ पत्रकार डी.एन. योगी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का विषय है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और वृक्षों को विशेष महत्व दिया गया है। हमारे पूर्वजों ने पेड़-पौधों को जीवनदाता माना, लेकिन आधुनिक जीवनशैली की दौड़ में हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों के प्रकाशन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव और जनजागरण का माध्यम भी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्पद पहल बताया।
ग्राम पंचायत चौरा की सरपंच श्रीमती दुर्गा लांझी ने कहा कि ग्रामीण जीवन और प्रकृति का संबंध सदैव अटूट रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। साथ ही इस आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन एवं वन विभाग को बधाई भी दी।

भोरमदेव अभ्यारण्य के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जय बंजारे ने वनों और जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वन केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण, वर्षा चक्र, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीव संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पौधारोपण के वैज्ञानिक लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं डिप्टी रेंजर जयकुमार बंजारे, बिट गार्ड लालचंद साहू, शिवकुमारी गोयल, विनोद भास्कर, हेमूकरम काचलाम सहित जंगल सफारी के गाइड एवं अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली तथा लगाए गए पौधों की सुरक्षा एवं संवर्धन का संकल्प दोहराया। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी साझा करते हुए लोगों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

करिया आमा जंगल सफारी की प्राकृतिक सुंदरता के बीच आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी, सामाजिक सहभागिता और जनजागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रकृति का संरक्षण किसी एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली सामाजिक प्रक्रिया है। लगाए गए पौधे भविष्य में न केवल हरियाली बढ़ाएंगे, बल्कि स्वच्छ वातावरण, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन की सामाजिक प्रतिबद्धता, पर्यावरणीय जागरूकता और जनहित के प्रति सकारात्मक सोच का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि यदि समाज, प्रशासन और जागरूक नागरिक मिलकर कार्य करें तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

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