बाबा भोरमदेव के जयकारे से गूंजा महोत्सव स्थल ओर लोक कला और शास्त्रीय विधाओं का दिखा अद्भुत संगम
30वां भोरमदेव महोत्सव: दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चार के साथ भगवान भोरमदेव की पूजा-अर्चना से हुई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत*
बाबा भोरमदेव के जयकारे से गूंजा महोत्सव स्थल ओर लोक कला और शास्त्रीय विधाओं का दिखा अद्भुत संगम

कवर्धा, 18 मार्च 2026। मैकल पहाड़ी श्रृंखलाओं से घिरे सुरम्य एवं ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर में 30वें भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ दीप प्रज्ज्वलन एवं मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोरमदेव की पूजा-अर्चना से हुई। इस अवसर पर कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बालका रामकिनकर वर्मा, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्री नन्द श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट, डॉ. वीरेन्द्र साहू, श्रीमती गंगा लोकचंद साहू, जनपद उपाध्यक्ष श्री गणेश, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी ने कहा कि भोरमदेव महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक है। इस तरह के आयोजनों से न केवल हमारी परंपराएं सजीव रहती हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण से यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने कहा कि भोरमदेव को हमारे प्रदेश सहित देश-विदेश के लोग छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से भी जानते हैं। इसी गौरवशाली पहचान को ध्यान में रखते हुए आज भोरमदेव महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कॉरिडोर उज्जैन और बनारस की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जो कबीरधाम जिले के लिए गर्व और सम्मान की बात है। इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल क्षेत्र का धार्मिक और पर्यटन महत्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निरंतर प्रयासों से कबीरधाम जिला विकास पथ पर निरंतर अग्रसर है। जिले में अनेक बड़े-बड़े विकास कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं, जिससे कबीरधाम की एक सशक्त पहचान अब राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर स्थापित हो रही है।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी ने कहा कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है। साथ ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का विकास तथा उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर का निर्माण देश की सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी क्रम में भोरमदेव बाबा में भी कॉरिडोर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि कवर्धा जिले में भी लगातार विकास कार्यों को गति दी जा रही है। जिले के विभिन्न मंदिरों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य हो रहे हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की पहचान और भी मजबूत होगी।
कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि भगवान भोरमदेव के आशीर्वाद से 146 करोड़ रुपए की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा रखी गई है। इस योजना के अंतर्गत मंदिर की पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कर समग्र विकास सुनिश्चित किया जाएगा उन्होंने बताया कि कॉरिडोर निर्माण कार्य प्रगतिरत होने के कारण इस वर्ष भोरमदेव महोत्सव के मूल आयोजन स्थल में परिवर्तन किया गया है। भोरमदेव मंदिर न केवल कबीरधाम जिले की पहचान है, बल्कि यह ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है, जो हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपरा को दर्शाती है। वर्ष 1995 से इस पारंपरिक मेले को भोरमदेव महोत्सव के रूप में नई पहचान दी गई। कला एवं संस्कृति से जुड़े प्रबुद्ध जनों के प्रयास से प्रारंभ हुआ यह महोत्सव आज क्षेत्र की लोक कला, लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है। इस महोत्सव के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को सहेजने एवं आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
महोत्सव में श्रद्धालुओं एवं दर्शकों ने बड़ी संख्या ने भाग लिया, जिससे पूरा परिसर भक्ति और उत्सव के माहौल में डूब गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध जसगीत गायक डॉ दिलीप षडंगी एवं लोकगायक आरू साहू ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। डॉ षडंगी के भक्ति भाव से भरे जसगीतों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। वहीं आरू साहू ने छत्तीसगढ़ी गीतों की दमदार प्रस्तुति देकर मंच पर समां बांध दिया, जिससे दर्शक झूम उठे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों और स्थानीय कलाकार कस्तूरबा विद्यालय कवर्धा और बोड़ला, बरपानी श्री मोहन, गौ करण यादव, कु. अक्षिता दुबे, युवराज सिंह लोनिया, कु. आद्या पाण्डेय, श्री कौशल साहू (लक्ष्य), सुश्री दुर्गेश्वरी चंद्रवंशी, रिंती लाल, श्री मोहम्मद अनस, श्री पितेलाल पटेल, श्री धनीदास मानिकपुरी और पवन चेलक ने प्रस्तुति दी।