कबीरधाम

पावन पर्व भोजली की बधाईयां

पावन पर्व भोजली की बधाईयां

29 अगस्त 2026, शनिवार, रक्षाबंधन का दूसरा दिवस, विशिष्ट सुसंयोग लिए पञ्च पञचमुखी महादेव का आराधना, उपासना, व्रत का मास सावन की समाप्ति, श्रावण पूर्णिमा के पश्चात भाद्र मास, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, छत्तीसगढ़ में मैत्री का सुंदर लोकसंस्कृति का स्नेहिल पारंपरिक त्योहार लोकप्रिय #मित्रता_का_पर्व_भोजली है! मित्रता को संबंध मे परिवर्तित करने अनेक संबोधन एवं साक्ष्य का आलंबन लेकर प्रकृतिदेव के उपासक छत्तीसगढ़ में प्रगाढ़ता सुनिश्चयन किया जाता है! भोजली के साथ ही गंगाजल, गजामूँग, सैनाहिन, गींयाँ, मितानीन, दोैनापान, तुलसीदल, जँवारा, महाप्रसाद बदने की परंपरा है जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी पवित्र रिश्ते की तरह निभाया जाता है ! इन संबंधों की खुबसूरती यह है कि जीवन पर्यन्त दोनो सखी संबंधी एक दुसरे का नाम जुबान पर नही लाते तथा संबोधन भी गंगाजल, भोजली या अन्य यथा बदना अनुरूप करते है ! छत्तीसगढ़ के विशिष्ट सांस्कृतिक मैत्री परंपरा वैश्वीकरण के दौर में तिरोहित होते जा रहा है ! सुख-दुख के साथी, सखा, संबंधी रिश्तेदारी मे भी परिवर्तित हो जाते हैं ! धार्मिक-सामाजिक समरसता का अनुपम अनूठा एवं अप्रतिम प्रतीक है छत्तीसगढ़ का फ्रेंडशिप डे भोजली, और कबीरधाम इसका विशिष्ट पहचान है ! राजप्रासाद में राजमाता से भेंट उपरान्त भोजली तालाब मे भोजली दाई का बाजे-गाजे के साथ ससम्मान विसर्जन, भोजली तालाब प्रक्षेत्र मे मनमोहक रंग-बिरंगे खेल खिलौना, बाजा, तुतरू, मेवा-मिठाईयां , लज्जीज गरम भुट्टे की ठेला मेला-मड़ाई सदृश्य मनोरम परिवेश आज देखते ही बनता है !

देवी गंगा, देवी गंगा लहर तुरंगा,
हमर भोजली दाई के भीजे आठों अंगा !

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